तुम्हारे साथ पूरा एक दिन बस खर्च करने की तमन्ना है !  

Posted by: ranjana bhatia in

जिंदगी की भागम भाग और रोजी रोटी की चिंता में न जाने कितने पल यूँ ही बीत जाते हैं ...अपनों का साथ जब कम मिल पाता है तो दिल में उदासी का आलम छा जाता है ..और तब याद आ जाता है वह गाना दिल ढूढता है फ़िर वही फुर्सत के रात दिन बैठे रहें तस्वुर -ऐ -जानां किए हुए ...पर कहाँ मिल पाते हैं वह फुर्सत के पल .. गुलजार जी ने इन्ही पलों को जिंदगी की खर्ची से जब जोड़ दिया तो इतने सुंदर लफ्ज़ बिखरे कागज पर कि लगा कि एक एक शब्द सच है इसका ...

खर्ची .

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन हर रोज़ मिलता है
मगर हर रोज़ कोई छीन लेता है ,झपट लेता है ,अंटी से


कभी खीसे से गिर पड़ता है तो गिरने कि आहट भी नही होती
खरे दिल को भी मैं खोटा समझ कर भूल जाता हूँ !

गिरेबां से पकड़ कर माँगने वाले भी मिलते हैं !
तेरी गुजरी हुई पुश्तों का कर्जा है ,
तुझे किश्तें चुकानी है -"

जबरदस्ती कोई गिरवी रख लेता है ये कह कर
अभी दो चार लम्हे खर्च करने के लिए रख ले
बकाया उम्र के खाते में लिख देते हैं ,
जब होगा हिसाब होगा

बड़ी हसरत है पूरा एक दिन इक बार मैं अपने लिए रख लूँ
तुम्हारे साथ पूरा एक दिन बस खर्च करने की तमन्ना है !

This entry was posted on Friday, July 11, 2008 and is filed under . You can leave a response and follow any responses to this entry through the Subscribe to: Post Comments (Atom) .

20 comments

ji haan gulzaar gulzar hi hai...islye sabse juda hai...

dil dundata hai fir wahi....fursat ke raat din....
itni bhaag dood hai jindagi mai ki pucho mat...
varana to Guljaar ne hi kaha hai----
eesa koi jindagi se vaada to nahi tha...
tere bina jeene ka eerada to nahi tha
Mavinder

bahut achcha laga blog dekhkar aur paRkar.
Thanks

बड़ी हसरत है पूरा एक दिन इक बार मैं अपने लिए रख लूँ
तुम्हारे साथ पूरा एक दिन बस खर्च करने की तमन्ना है !
kUCHH HAD TAK IS HASRAT SE MAUN BHI TALLUKAT RAKHTA HUN.......
BEHTARIN.
Abhinav Jha

कया बात हे,आप का धन्यवाद गुलजार जी की इस रचना के लिये.

गुलजारजी का लिखा अच्छा होता ही है, सुनते वक्त उसे आप जी रहे होते हैं, महसूस कर रहे होते है, और लगता है कि बस सुनते रहें....यूं ही ...अक्सर।

बहुत खूब...गुलज़ार के भाव गुलों का खुशबूदार गुलदस्ता है जिनकी खुशबू दूर दूर तक फैल जाती है.

आभार, गुलजार जी की इस रचना के लिये.

Hasrat to aisi hi kuchh hamaari bhi hai, par poora ek din milta kahan hain... aur aisi samsya agar hai to gulzaar ke alaawa aur kaun samajh sakta hai !

good yaar mujhe bhi us ek din ka intezaar hain

gulzar sahab ki ye rachana post karne ke liye shukriya

Shukriya.. gulzar sahab ki is rachan ko share karne ke liye..:)

कहे बिना रहा नहीं गया, great efforts!

guljaar gi aur aap ka aabhaar

is ke liye aapko bahut bahut badhai.

http://therajniti.blogspot.com/

bahut be waqt vida hue VP Singh. Mumbai ki ghatna ki wajag se humne thik se vidai bhi nahi di.

http://therajniti.blogspot.com/

khuchh kahen kaise ham ? suraj ko diya dikhana hi hoga

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन हर रोज़ मिलता है
मगर हर रोज़ कोई छीन लेता है ,झपट लेता है ,अंटी से


कभी खीसे से गिर पड़ता है तो गिरने कि आहट भी नही होती
खरे दिल को भी मैं खोटा समझ कर भूल जाता हूँ !
khise shabd padhakar apna pura bachpan ankho ke samne jeevant ho gya
bhut sundar lmho se prichay karane ke liye dhnywad

Sanjeedgi se ki gyi ek pehal....ke liye subhkamnyein.

MUJHE GULJAAR KI WO NAZM KI TALAASH HAI JO UNHONE PRAVAASI BHARTIYA DIVAS YA VISHVA HINDI SAMMELAN KE DAURAN KAHI THI JISME EK BAAAP NE APNI VYATHA SUNAAI THI KI UNKA BETA VIDESH ME ITNA BUSY REHTA HAI KI APNE MAA BAAP SE MILNE KISI AUR KO BESH BADALKAR MILNE BHEJ DETA HAI

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