कायनात  

Posted by: ranjana bhatia in

बस चंद करोडो सालों में
सूरज की आग बुझेगी जब
और राख उडेगी सूरज से
जब कोई चाँद न डूबेगा
और कोई जमीं न उभरेगी
तब ठंडा बुझा इक कोयला सा
टुकडा ये जमीं पर घूमेगा
भटका -भटका
मद्धम खकिसत्री रौशनी में

मैं सोचता हूँ उस वक्त अगर
कागज पर लिखी एक नज्म कहीं उड़ते उड़ते
सूरज में गिरे
तो सूरज फ़िर से जलने लगे !

और यह नज्म यदि गुलजार की लिखी हो तो सारी रुकी हुई कायनात चलने लगती है ..जय हो के नारे से सारा विश्व गूंजने लगता है और एक जज्बा मोहब्बत का उनकी नज्म से उतर कर हर दिल में उतर जाता है ,इस अभिमान के साथ कि गुलजार की ऑस्कर मिलना , ऑस्कर का सम्मान है |

This entry was posted on Monday, February 23, 2009 and is filed under . You can leave a response and follow any responses to this entry through the Subscribe to: Post Comments (Atom) .

22 comments

बिल्कुल ठीक.. गुलज़ार साहब को ऑस्कर मिलना ऑस्कर का ही सम्मान कहा जाएगा.. मेरी नज़र में तो गुलज़ार साहब का लिखा हर गीत ही ऑस्कर का हकदार है..

गुलजार ..गुलजार हैं। बस जी, यही कहूंगा। वो इश्क को नमकीन बनाते हैं फिर जिगर में आग लगाते हैं। अब बोलिए उनकी नहीं तो किसकी जय हो ..होगी।

तब ठंडा बुझा इक कोयला सा
टुकडा ये जमीं पर घूमेगा
भटका -भटका
मद्धम खकिसत्री रौशनी में
regards

सुंदर प्रस्तुति के लिए आभार.

@Ranjana Ji,
Aap yahan bhi hain. Wah wah, Ye cheez thodi thodi samjah mein aati hai humein. Yahan hum aksar aate rahenge. Gulzaar sahab to great hain kabhi wo 'Geeli Hansi' ki baat karte hain to kabhi 'Uske naam ki ek dali ki'.

"मैं सोचता हूँ उस वक्त अगर
कागज पर लिखी एक नज्म कहीं उड़ते उड़ते
सूरज में गिरे
तो सूरज फ़िर से जलने लगे !"

Bahut achha. Bahuta jyada achha!!

सुंदर पोस्ट। आजकल तो हम भी जब समय होता है तो गुलजार जी के साथ हो लेते है।
मैं सोचता हूँ उस वक्त अगर
कागज पर लिखी एक नज्म कहीं उड़ते उड़ते
सूरज में गिरे
तो सूरज फ़िर से जलने लगे !

अद्भुत।

जरूर ही गुलजार का लिखा एक एक शब्द प्यार की चासनी में पगा, संवेदना और अनुभूति से सहलाया मिलेगा.
सौ फ़ीसदी सच है यह, "गुलजार को ऑस्कर मिलना , ऑस्कर का सम्मान है |"

यार जुलाहे यार जुलाहे
मुझको भी तरकीब सिखादे जब कोईतागा tut गया तो और सिरा जोड़ कर उसे bunne लगते हो
यार जुलाहे
सौ फ़ीसदी सच है यह, "गुलजार को ऑस्कर मिलना , ऑस्कर का सम्मान है |"

ye to sirf gulzar sahab hi likh sakte hai ..
he is different.
-tarun

gulzar jo kabhi harfon me murjaya nahin mere jahnmen.....

दिल की बात कह दी आपने गुलज़ार साब को ऑस्कर , ऑस्कर का ही सम्मान है

गुलजार जी आस्कर से बहुत ऊपर हैं.....

GULZAR SAHAB BAHUT BAHUT BADHAI. YE AWARD BAHUT PAHLE AAPKO MILNA CHAHIYE THA. AAP SABHI SE ALAG HAIN. ABHI 14 FEB. KO LUCKNOW ME AAPKE SATH BAITHKER AAPKA PLAY KHARAANSHEIN DEKHNE KO MILA. EK DARSHAK KE HEART ATTACK KI GHATNA K DISTURBANCE K BAVJOOD PLAY NE HRIDAY ME GHOSLA BANA LIYA. YUGON TAK AISE HI LIKHTE AUR TENIS KHELTE RAHEIN AAP. JAI HO AAPKI.
SATYENDRA SHALABH

bilkul, wo bujha suraj jal uThega, gar wo najma Gulzar ki ho. Thanks.

-:गुलजार:-
तेरी जुबाँ का लफ्ज हर एक नज्म बन जाये
तेरी आवाज से छु जाना ही बस गीत बन जाये
क्या तुम गुड की चासनी से नहा के निकले हो!
या फिर ये दिल ही शरबत है, बिला वज़हों के मीठा है........

-:गुलजार:-
तेरी जुबाँ का लफ्ज हर एक नज्म बन जाये
तेरी आवाज से छु जाना ही बस गीत बन जाये
क्या तुम गुड की चासनी से नहा के निकले हो!
या फिर ये दिल ही शरबत है, बिला वज़हों के मीठा है........rohit

जनाब, आपका शुक्रिया, की आपने यह गुलजारसाहाब का नायाब खजाना सबके लिये खोल दिया...

मेरे पासभी उनकी कुछ creations है, मै post करुंगा...

interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this website to increase visitor.Happy Blogging!!!

एक नहीं हर रचना सुन्दर
कहते हैं इनको गुलज़ार,
शब्द नहीं मोती चुनते हैं
फिर भरते हैं उसमें प्यार...
पढनेवाला पढता जाये
ख्वाब सुनहरे गढ़ता जाए
और अंत में मुह से निकले
हाय लिखनेवाला कौन है यार?!

"दिल है तो दर्द होगा,दर्द है तो दिल भी होगा।"
दुनियां में इससे सच्ची और सुन्दर पंक्ति सिर्फ गुलजार ही लिख सकते हैं।।

कुछ लीखूं नज्म में तो क्या क्या आफते लाती है
इतने लब्जो में तुम्हे चुनाती जीतने करीबी तुम हो नही

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